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विदेश से कमाएँ, सुविधा लें भारत में


NRI Account क्या होता है? एक विस्तृत जानकारी

एक ऐसा विशेष बैंक खाता है जिसे भारतीय बैंक विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए प्रदान करते हैं, ताकि वे अपने विदेशी आय, भारतीय आय, और विदेश व भारत के बीच होने वाले पैसों के लेन-देन को आसानी से संभाल सकें।इसका उद्देश्य NRI की वित्तीय गतिविधियों को भारतीय बैंकिंग कानून (FEMA) के अनुसार व्यवस्थित करना होता है।


NRE Account And NRO Account 

भारत से बाहर रहने वाले भारतीयों (NRI – Non-Resident Indian) के लिए बैंक दो खास प्रकार के खाते उपलब्ध कराते हैं: NRE और NRO। दोनों खाते भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण हैं और इनका उद्देश्य अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा करना है।


NRE Account (Non-Resident External Account)यह क्या है?

NRE खाता वह बैंक खाता है जिसमें NRI व्यक्ति विदेश में कमाई गई आय (Foreign Income) को भारत में जमा कर सकता है। यह खाता पूरी तरह से विदेशी मुद्रा में फंड स्वीकार करता है और भारत में रुपयों में संचालित होता है।

मुख्य विशेषताएँ

1. विदेशी (Foreign) आय जमा होती है

यह खाता सिर्फ विदेश से आने वाले पैसे के लिए है। भारत में कमाए पैसे NRE खाते में जमा नहीं किए जा सकते।

2. Full Repatriation (पूरी राशि बाहर भेज सकते हैं)

NRE खाते से जमा रकम और ब्याज — दोनों को आप पूरी तरह और आसानी से विदेश वापस भेज सकते हैं।

3. Tax Benefits (पूरा टैक्स फ्री)

  • इस खाते पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री है।
  • इस पर इनकम टैक्स, वेल्थ टैक्स या गिफ्ट टैक्स लागू नहीं होता।

4. संयुक्त खाता (Joint Account)

दूसरे NRI के साथ खोला जा सकता है (भारतीय निवासी के साथ नहीं)।

किसके लिए उपयोगी?

  • विदेश में कमाने वाले लोग, जिन्हें अपनी कमाई भारत भेजनी हो
  • जिन्हें भारत में निवेश या बचत करनी हो
  • जो टैक्स-फ्री ब्याज चाहते हों

NRO Account (Non-Resident Ordinary Account)यह क्या है?

NRO खाता वह खाता है जिसमें NRI व्यक्ति भारत में कमाई हुई आय जमा कर सकता है।
जैसे—

  • किराया (Rent)
  • पेंशन
  • डिविडेंड
  • भारतीय बिजनेस से आय
  • एफडी का ब्याज आदि

मुख्य विशेषताएँ

1. भारतीय आय जमा होती है

NRO खाता भारत में होने वाले किसी भी प्रकार की स्थानीय आय को संभालने के लिए होता है।

2. Limited Repatriation (सीमित पैसा विदेश भेज सकते हैं)

  • NRO खाते से प्रति वर्ष $1 मिलियन तक ही विदेश भेज सकते हैं।
  • इसके लिए फ़ॉर्म 15CA/CB और CA सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है।

3. Taxable Income (टैक्स लगता है)

  • NRO खाते पर मिलने वाले ब्याज पर TDS 30% लगता है। (अगर DTAA लागू है — तो टैक्स कम हो सकता है।)

4. संयुक्त खाता

  • भारतीय निवासी (Resident Indian) के साथ भी खोला जा सकता है।

किसके लिए उपयोगी?

  • NRI जिन्हें भारत में किराया/बिजनेस/डिविडेंड आदि मिलता है
  • जो भारत में चल रही वित्तीय गतिविधियों को नियंत्रित करना चाहते हों


NRE vs NRO — एक नज़र में मुख्य अंतर

NRE और NRO खाते में मुख्य अंतर यह है कि NRE खाता केवल विदेश में कमाई गई आय को भारत में रखने के लिए होता है और इस खाते पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है तथा इसमें जमा रकम को बिना किसी सीमा के आसानी से विदेश भेजा जा सकता है। दूसरी ओर, NRO खाता भारत में मिलने वाली आय—जैसे किराया, पेंशन, ब्याज या डिविडेंड—को संभालने के लिए होता है, इस पर मिलने वाले ब्याज पर 30% TDS लगता है और खाते से विदेश पैसा भेजने पर सालाना $1 मिलियन की सीमा रहती है। सरल शब्दों में, NRE विदेशी आय के लिए टैक्स-फ्री और पूरी तरह रिपैट्रिएबल खाता है, जबकि NRO भारतीय आय के लिए टैक्सेबल और सीमित रिपैट्रिएशन वाला खाता है।


NRE या NRO — कौन सा खाता चुनें?

अगर आपकी आय विदेश में है → NRE सही विकल्प

  • बेहतर ब्याज
  • पूरा टैक्स फ्री
  • पैसा विदेश भेजने की पूरी स्वतंत्रता

अगर आपकी आय भारत में भी है → NRO आवश्यक

  • किराया, पेंशन, डिविडेंड जैसी भारतीय आय रखने के लिए
  • टैक्स नियमों के अनुरूप

ज्यादातर NRI दोनों खाते का उपयोग करते हैं

  • NRE → विदेशी आय रखने के लिए
  • NRO → भारतीय आय रखने के लिए


निष्कर्ष (Conclusion)

NRE और NRO खाते NRI के लिए दो महत्वपूर्ण बैंकिंग विकल्प हैं जिनका उद्देश्य अलग-अलग आर्थिक जरूरतों को पूरा करना है। विदेश में कमाई के लिए — NRE, भारत से होने वाली आय के लिए — NRO

अगर इन्हें सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो टैक्स-सेविंग, पैसा भेजने में आसानी, और बैंकिंग सुविधा काफी बेहतर हो जाती है।

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