DA (महँगाई भत्ता) क्या है, क्यों दिया जाता है और किस आधार पर तय होता है?
महँगाई भत्ता (DA) भारत में वेतन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के प्रभाव से राहत देने के लिए दिया जाता है। यह मुख्य रूप से केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलता है।
DA वह भत्ता है जो मूल वेतन (Basic Pay) के साथ जोड़ा जाता है, ताकि बढ़ती कीमतों (inflation) के कारण कर्मचारियों की क्रय-शक्ति (purchasing power) बनी रहे।
DA क्यों दिया जाता है?
- महंगाई दर में बदलाव का असर वेतन पर न पड़े
- कर्मचारियों के जीवन-स्तर को संतुलित रखना
- आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती कीमतों की भरपाई करना
DA की गणना कैसे होती है?
DA की गणना Consumer Price Index (CPI) के आधार पर की जाती है। केंद्र सरकार आमतौर पर साल में दो बार (जनवरी और जुलाई) DA में संशोधन करती है।
DA = Basic Pay × DA प्रतिशत
DA के प्रकार
- Industrial DA (IDA) – सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए
- Variable DA (VDA) – निजी क्षेत्र के कुछ कर्मचारियों के लिए, जो न्यूनतम वेतन से जुड़ा होता है
DA का महत्व
- वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी
- आर्थिक सुरक्षा
- कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना
DA तय करने का अधिकार सरकार के पास होता है।
1.केंद्र सरकार के कर्मचारियों का DA
- भारत सरकार (Union Cabinet) तय करती है
- DA बढ़ाने का फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल करता है
2.राज्य सरकार के कर्मचारियों का DA
- संबंधित राज्य सरकार तय करती है
- हर राज्य अपना DA अलग-अलग समय पर बढ़ाता है
आधार क्या होता है?
- DA तय करने का मुख्य आधार है Consumer Price Index (CPI)
- CPI के आंकड़े Labour Bureau (श्रम ब्यूरो), भारत सरकार जारी करता है
- इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार DA बढ़ाने या न बढ़ाने का निर्णय लेती है
निष्कर्ष:
Dearness Allowance वेतन संरचना का एक अहम हिस्सा है, जो महंगाई के दौर में कर्मचारियों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है। समय-समय पर DA में बढ़ोतरी कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों के लिए राहत का काम करती है।

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